
गाजीपुर जिला के जमानिया कोतवाली क्षेत्र में स्थिर पचोखर गांव के वीर अमर शहीद नायब सूबेदार विजय शंकर सिंह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए 18 जुलाई 2002 को मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिए थे l
अमर शहीद नायब सूबेदार विजय शंकर सिंह की 24वीं पुण्यतिथि (शहादत दिवस) आज 18 जुलाई 2026 को उनके पैतृक गांव पचोखर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सैनिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के रेंजर जयशंकर प्रसाद वर्मा एवं उनकी टीम ने शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि शहीदों की स्मृति में लगाए गए पौधे आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम और प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देंगे।
इसी अवसर पर जमानिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. रूद्र कुमार सिंह एवं उनकी टीम द्वारा सीनियर सिटीजन स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया।
शिविर में बुजुर्गों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यक चिकित्सीय परामर्श एवं दवाइयों का वितरण किया गया।
शहादत दिवस कार्यक्रम में शौर्य सैनिक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन सुब्बा यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों एवं सैनिक परिवारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार लेफ्टिनेंट श्याम सुन्दर गुप्ता, सूबेदार मैनेजर सिंह एवं नायब सूबेदार अशोक कुमार पाण्डेय रहे। इस अवसर पर अनेक पूर्व सैनिकों, ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान शहीद परिवार की वीर नारियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और उनकी स्मृतियों को सहेजना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उल्लेखनीय है कि नायब सूबेदार विजय शंकर सिंह ने मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री से भारतीय सेना में सेवा करते हुए 42 राष्ट्रीय राइफल्स (42 RR) में प्रतिनियुक्ति पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 18 जुलाई 2002 को कुपवाड़ा क्षेत्र में आतंकवादियों से वीरतापूर्वक मुकाबला करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। राष्ट्र उनके अद्वितीय साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को सदैव नमन करता रहेगा।




